प्यारे जू तिहारी प्यारी अति ही गरब भरी - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम मालिका (53)
हे प्यारे जू, आपकी प्राण प्यारी श्री राधा अति ही गर्व से भरी है, दृढ हठीली हैं, उन्हें आप ही मनाइये।
प्रेम मालिका श्री भारतेंदु हरिशचंद्र द्वारा रचित भारतेंदु ग्रंथावली का दूसरा अध्याय है जिसमें 3 भांति के मधुर कीर्तन सम्मिलित हैं, प्रथम लीला सम्बन्धी, दूसरा दैन्य भाव भावित एवं तीसरा प्रेममय अनुभव के।
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हे प्यारे जू, आपकी प्राण प्यारी श्री राधा अति ही गर्व से भरी है, दृढ हठीली हैं, उन्हें आप ही मनाइये।
कृपया मुझे ब्रज धाम में एक वृक्ष पर एक लता या एक पत्ता बना दें! तब मैं गोपियों के चरण कमलों से निसृत परम पवित्र रज में अपना सिर स्नान कर सकूंगा।