राधा जी हो वृषभानु कुमारी - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम तरंग (1)
कुंवरी श्री राधिका ही श्री वृषभानु जी की लाड़ली हैं जिनके चरण नख की कांति पर कोटि कोटि चंद्रमा नयौछावर किए जा सकते हैं । श्री राधिका श्री कीर्ति महारानी के आँखों की उजियारी हैं ।
