प्रेम तरंग [भारतेंदु ग्रंथावली]

प्रेम तरंग श्री भारतेंदु हरिशचंद्र द्वारा रचित भारतेंदु ग्रंथावली का नौवां अध्याय है जिसमें श्री राधा कृष्ण के विभिन्न लीला सम्बन्धी पद सहित विरह के पद सम्मिलित हैं।

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  1. राधा जी हो वृषभानु कुमारी - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम तरंग (1)

    कुंवरी श्री राधिका ही श्री वृषभानु जी की लाड़ली हैं जिनके चरण नख की कांति पर कोटि कोटि चंद्रमा नयौछावर किए जा सकते हैं । श्री राधिका श्री कीर्ति महारानी के आँखों की उजियारी हैं ।