श्री प्रियाजी के जन्मोत्सव के कवित्त [श्री नागरीदास]

श्री प्रियाजी के जन्मोत्सव के कवित्त, श्री नागरीदास जी की वाणी का एक अध्याय है जिसमें श्री राधारानी के जन्मोत्सव के कवित्त हैं । रचयिता: श्री नागरीदास जी

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  1. कीरति महारानी, वृषभानु आदि गोपी गोप - श्री नागरीदास जी, श्री नागरीदास जी की वाणी, श्री प्रियाजी के जन्मोत्सव के कवित्त (11)

    महारानी कीर्ति एवं महाराज वृषभानु जी समेत समस्त गोप और गोपियां इस कलयुग में भी क्यों धन्य कहलाए जाते हैं। वृंदावन के वासियों ने कौन सी तपस्या की है कि उन्हें वृंदावन का वास प्राप्त हुआ है