ललिता श्रीहरिदासी के आँगन सुखद - श्री राधाशरण देव
स्वामी श्रीहरिदास जी (ललिता सखी) के आँगन में अत्यंत सुखदाई बधाई बज रही है, क्योंकि रसिक भक्तों को परमानंद प्रदान करने के लिए निकुंज महल से साक्षात् श्रीबाँकेबिहारी जी प्रकट हो गए हैं।
श्री राधाशरण देव जी वृंदावन की टटिया स्थान परंपरा के एक प्रमुख संत और आचार्य थे। आप श्री ललितमोहिनी देव जी के शिष्य थे और बाद में वर्ष 1811 से 1821 तक टटिया स्थान के महंत रहे। आपने वर्ष 1784 में सखाराम को इस परंपरा में दीक्षित किया और उन्हें 'श्री सहचरीशरण देव जी' नाम प्रदान किया। वर्ष 1821 में श्री राधाशरण देव जी के तिरोभाव के पश्चात, श्री सहचरीशरण देव जी महंत के रूप में उनके उत्तराधिकारी बने।
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स्वामी श्रीहरिदास जी (ललिता सखी) के आँगन में अत्यंत सुखदाई बधाई बज रही है, क्योंकि रसिक भक्तों को परमानंद प्रदान करने के लिए निकुंज महल से साक्षात् श्रीबाँकेबिहारी जी प्रकट हो गए हैं।