श्री राधा कृपा कटाक्ष

श्री राधा कृपा कटाक्ष, भगवान शिव द्वारा लिखित श्री राधारानी की कृपा कटाक्ष की याचना है । यह प्रार्थना उर्वधमन्नय-तंत्र नाम के तंत्र में भगवान शिव द्वारा पार्वती माता से बोली गयी है ।

4 लेख उपलब्ध हैं

  1. राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र - भगवान शंकर जी द्वारा रचित

    भावार्थ : समस्त मुनिगण आपके चरणों की वंदना करते हैं, आप तीनों लोकों का शोक दूर करने वाली हैं, आप प्रसन्नचित्त प्रफुल्लित मुख कमल वाली हैं, आप धरा पर निकुंज में विलास करने वाली हैं। आप राजा वृषभानु की राजकुमारी हैं, आप ब्रजराज नन्द किशोर श्री कृष्ण की चिरसंगिनी है, हे जगज्जननी श्रीराधे माँ! आप मुझे कब अपनी कृपा दृष्टि से कृतार्थ करोगी ? (१)

  2. मखेश्वरी क्रियेश्वरी स्वधेश्वरी - राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र १२

    आप सभी प्रकार के यज्ञों की स्वामिनी हैं, आप संपूर्ण क्रियाओं की स्वामिनी हैं, आप स्वधा देवी की स्वामिनी हैं, आप सब देवताओं की स्वामिनी हैं, आप तीनों वेदों की स्वामिनी है, आप संपूर्ण जगत पर शासन करने वाली हैं।

  3. राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र (2) - भगवान शंकर जी द्वारा रचित

    भावार्थ : आप अशोक की वृक्ष-लताओं से बने हुए मंदिर में विराजमान हैं, आप सूर्य की प्रचंड अग्नि की लाल ज्वालाओं के समान कोमल चरणों वाली हैं, आप भक्तों को अभीष्ट वरदान, अभय दान देने के लिए सदैव उत्सुक रहने वाली हैं। आप के हाथ सुन्दर कमल के समान हैं, आप अपार ऐश्वर्य की भंङार स्वामिनी हैं, हे सर्वेश्वरी माँ! आप मुझे कब अपनी कृपा दृष्टि से कृतार्थ करोगी ? (२)

  4. निरन्तरं वशीकृत प्रतीतनन्दनन्दने - भगवान शंकर जी, राधा कृपा कटाक्ष

    हे राधे, आप श्री नन्दकिशोर को निरंतर अपने बस में किये रहती हैं, हे जगज्जननी वृन्दावनेश्वरी माँ! आप मुझे कब अपनी कृपा दृष्टि से कृतार्थ करोगी ?