तें रहीम मन आपुनो, कीनहौं चारु चकोर - श्री रहीम दास
अपने मन को उस चकोर के समान बना लो, जो दिन-रात चंद्रमा की ओर ही देखता रहता है; उसी प्रकार तुम्हारा मन भी सदा श्री कृष्णचंद्र की ओर लगा रहे।
श्री रहीम दास जिनका नाम खानजादा मिर्जा खान अब्दुल रहीम (17 दिसंबर 1556 - 1 अक्टूबर 1627) एक भक्त कवि थे, जो मुगल सम्राट अकबर के शासन के दौरान भारत में रहते थे, एवं अकबर के गाइडभी थे। वह अपने दरबार में नौ महत्वपूर्ण मंत्रियों (दीवान) में से एक थे, जिन्हें नवरत्नों के नाम से भी जाना जाता है।
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अपने मन को उस चकोर के समान बना लो, जो दिन-रात चंद्रमा की ओर ही देखता रहता है; उसी प्रकार तुम्हारा मन भी सदा श्री कृष्णचंद्र की ओर लगा रहे।