रूप प्रेम आनंद रस जो कछु जग मैं आहि - नंद दास ग्रंथावली, रस मंजरी (7)
इस जगत में रूप (सौंदर्य), प्रेम, आनंद और रस के रूप में जो कुछ भी दिखाई देता है, उन सब के आधार श्री गिरधर देव (श्री कृष्ण) हैं। इसलिए मैं निडर होकर, बिना किसी संकोच के, उन्हीं श्री कृष्ण के स्वरूप का वर्णन करता हूँ।
