रस मंजरी [श्री नंददास जी]

रस मंजरी श्री नंददास जी द्वारा रचित नंददास ग्रंथावली का छठा अध्याय है। इस अध्याय में श्री श्यामाश्याम की सेवा में उपस्थित सखियों के प्रकार एवं भेद का वर्णन किया गया है।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. रूप प्रेम आनंद रस जो कछु जग मैं आहि - नंद दास ग्रंथावली, रस मंजरी (7)

    इस जगत में रूप (सौंदर्य), प्रेम, आनंद और रस के रूप में जो कुछ भी दिखाई देता है, उन सब के आधार श्री गिरधर देव (श्री कृष्ण) हैं। इसलिए मैं निडर होकर, बिना किसी संकोच के, उन्हीं श्री कृष्ण के स्वरूप का वर्णन करता हूँ।