शिक्षापद्यानि

जब महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी गृह त्याग कर लीला संवरण हेतु काशी के हनुमान घाट पर गंगा के तट पर आये, उनके दोनों पुत्र और शिष्यगण भी वहां अंतिम उपदेश ग्रहण करने आये थे । महाप्रभु माता गंगा के माध्यम से श्री कृष्ण में विलीन होने से ठीक पहले बालुका में साढ़े तीन पंक्तियाँ लिखी जो अब शिक्षापद्यानि ग्रन्थ में संकलित हैं ।

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  1. शिक्षापद्यानी - महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य

    यदि तुम श्री कृष्ण से विमुख हो जाओगे तो कालिकाल के प्रभाव में रहने वाले तुम्हारा तन और मन समय के प्रवाह से तुम्हारा नाश कर देंगे ऐसा मेरा विश्वास है । श्री कृष्ण सांसारिक नहीं हैं और न ही वे सांसारिक लोगों की पूजा को स्वीकार करते हैं ।