हे वृषभानुराज-नन्दिनि - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार, षोडश गीत (5)
हे वृषभानु नंदिनी श्री राधा, हे अतुल-प्रेम-रस-सुधा निधान, मैं तो वन-वन भटकता हुआ गाय चराता हूँ, मैं प्रेम-विधान क्या जानूँ ?
षोडश गीत श्री श्यामाश्याम का ह्रदय है जिसमें षोडश (16) पद संकलित हैं । 8 पद श्री कृष्ण का श्री राधा के प्रति प्रेमोद्गार हैं एवं 8 श्री राधा का श्री कृष्ण के प्रति । लेखक: श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार
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हे वृषभानु नंदिनी श्री राधा, हे अतुल-प्रेम-रस-सुधा निधान, मैं तो वन-वन भटकता हुआ गाय चराता हूँ, मैं प्रेम-विधान क्या जानूँ ?
दोनों श्री राधा कृष्ण चकोर (वह पक्षी जो चन्द्रमा के प्रेम में विभोर रहता है) हैं, दोनों चन्द्रमा (चकोर का प्रेमास्पद) हैं, दोनों भ्रमर हैं और दोनों कमल पुष्प भी हैं । दोनों चातक हैं (वह पक्षी जो श्याम मेघ से प्रेम करता है) और दोनों मेघ हैं (चातक पक्षी का प्रेमास्पद), दोनों जल हैं एवं दोनों मछली भी हैं ।