नेकहु मन ते होत न न्यारी - श्री हित प्रेमदासी जी
हे प्यारी जू [श्री राधे], आपकी छवि मेरे मन से एक पल के लिए भी विलग नहीं होतीं। दिन-रात, हर समय आप मेरी आँखों में बसी रहती हैं; जहाँ भी दृष्टि डालती हूँ, बस आपको ही देखती हूँ।
श्री हित प्रेमदास, वृंदावन के राधा वल्लभ संप्रदाय के एक रसिक भक्त हैं
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हे प्यारी जू [श्री राधे], आपकी छवि मेरे मन से एक पल के लिए भी विलग नहीं होतीं। दिन-रात, हर समय आप मेरी आँखों में बसी रहती हैं; जहाँ भी दृष्टि डालती हूँ, बस आपको ही देखती हूँ।