श्री वनचंद्र जी

श्री वनचंद्र जी श्री हित हरिवंश महाप्रभु के ज्येष्ठ पुत्र थे। वह देववन में श्री नवरंगी लाल जी की सेवा करते थे लेकिन कुछ समय पश्चात वृन्दावन आ गए। श्री हित महाप्रभु के निकुंज गमन के पश्चात् रसिकों ने इन्हें राधावल्लभ संप्रदाय के गादी पर बैठाया और तबसे इनका नाम वनमालिदास हुआ।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. हमारे बल श्री राधा नाम - श्री वनचंद्र जी

    श्री वनचंद्र जी कहते हैं "किसी का बल भजन भावना है तो किसी का बल जप है, किसी का व्रत है तो किसी का तीर्थाटन, लेकिन मेरा बल तो केवल श्री राधा नाम है। श्री हित जू ने मुझे परम मन्त्र प्रदान किया है और मैं हर समय उसीका जप करता हूँ।"