श्रृंगार सभा मंडल [बयालीस लीला]

श्रृंगार सभा मंडल श्री ध्रुवदास द्वारा रचित बयालीस लीला का सत्रहवाँ अध्याय है जिसमें 223 दोहे और कविताएँ हैं जो श्री राधा कृष्ण के श्रृंगार रस को समर्पित हैं।

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. रूप प्रिया कौ कहन कौं - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रृंगार सभा मण्डल (39)

    श्री प्रियाजी (श्री राधा) के रूप का वर्णन करने की सामर्थ्य मेरी अल्प बुद्धि में कहाँ है? जिनके नयनों की केवल एक कटाक्ष-मात्र से स्वयं सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण भी मोहित होकर उनके चरण कमलों में विभोर होकर लोटने लगते हैं।

  2. कोटि-कोटि रसना जो रोम - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रृंगार सभा मण्डल (126)

    यदि शरीर के प्रत्येक रोम से कोटि-कोटि जिह्वाएँ प्रकट हो जाएँ, तब भी रूप-राशि प्रिया के अनंत सौंदर्य और माधुर्य का सीमित वर्णन करना असंभव ही रहेगा।