सिद्धान्तरहस्यम् - श्री वल्लभाचार्य
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि की मध्य रात्रि में श्री कृष्ण मेरे सामने प्रकट हुए । अब मैं उन वचनों को प्रकट करूँगा जो उन्होंने कहा था ।
श्री वल्लभाचार्य जी का सिद्धांत (पुष्टि मार्ग) श्री कृष्ण का उनके चिंता का प्रत्यक्ष उपदेश है जो इस कलियुग में पतित जीवों को भगवदमार्ग में आरूढ़ करेगा । श्री वल्लभाचार्य जी के पुष्टि मार्ग की नींव उस महारात्रि को, गोकुल में यमुना के तट पर स्वयं श्री कृष्ण द्वारा स्थापित की गई थी । निम्नलिखित आठ श्लोकों में समर्पण और दिव्य संबंध के रहस्य प्रकट किये गए हैं ।
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श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि की मध्य रात्रि में श्री कृष्ण मेरे सामने प्रकट हुए । अब मैं उन वचनों को प्रकट करूँगा जो उन्होंने कहा था ।