माधुर्ये मधुरा राधा महत्त्वे राधिका गुरुः - उदम्बर संहिता (1385)
श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं उन श्री राधा की आराधना करता हूँ जो मधुरता में मधुर, महत्ता में गुरु और सुन्दरता में सुन्दर हैं ।
उदम्बर संहिता निम्बार्क सम्प्रदाय के संत श्री उदम्बर जी द्वारा रचित एक ग्रंथ है ।
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श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं उन श्री राधा की आराधना करता हूँ जो मधुरता में मधुर, महत्ता में गुरु और सुन्दरता में सुन्दर हैं ।
श्री कृष्ण कहते हैं: मेरी जीभ पर सदा राधा का नाम और नेत्रों के सामने श्रीराधा की मूर्ति रहती है, राधा मेरा हृदय है, मैं उन्हीं राधा की आराधना करता हूँ।
श्रीराधिका कृष्ण तत्व से एक होने पर भी अनादि काल से विच्छेद रहित इस प्रकार युगल हैं जैसे जल और उसकी तरंगे कभी अलग अलग नहीं होती हैं। इनका साक्षातकार एक मात्र सत्संग से ही हो सकता है।