हमारी श्री राधा महारानी - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, वर्षा विनोद (35)
हमारी श्री राधा महारानी तीनों लोकों के ठाकुर की भी ठकुरानी हैं ।
वर्षा विनोद श्री भारतेंदु हरिशचंद्र द्वारा रचित भारतेंदु ग्रंथावली का सत्रहवाँ अध्याय है जिसमें श्री राधा कृष्ण के वर्षा ऋतू के लीला सम्बन्धी मधुर पद सम्मिलित हैं।
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हमारी श्री राधा महारानी तीनों लोकों के ठाकुर की भी ठकुरानी हैं ।