चलो लाल खेलें बसंत - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विलास, वसन्त लीला (14)
हे लाल (प्रियतम)! आओ, हम श्री यमुना के तट पर मिलकर वसंत खेलें। वन के निकुंजों में नई ऋतु आई है और नये-नये फूल खिल उठे हैं।
वसंत लीला 'ब्रज विहार' ग्रन्थ का एक अध्याय है जिसमें श्री नारायण स्वामी द्वारा लिखित दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण के वसंत ऋतु के मधुर लीलाओं का वर्णन है।
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हे लाल (प्रियतम)! आओ, हम श्री यमुना के तट पर मिलकर वसंत खेलें। वन के निकुंजों में नई ऋतु आई है और नये-नये फूल खिल उठे हैं।
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि श्री धाम वृंदावन में बसंत निशिदिन (सदैव) बसंत रहता है जहां दिव्य युगल सरकार, राधा कृष्ण, दोनों आनंदचित्त होकर अनंत क्रीड़ाएँ करते रहते हैं ।
श्री राधा का मुकुट फूलों से बना है और उनके शीश पर फूल सुशोभित हैं। प्यारी जी के कान फूलों से बने झुमकों से सजाए गए हैं।