श्री यमुनाष्टकम् - श्री वल्लभाचार्य

श्री यमुनाष्टकम् श्री वल्लभाचार्य द्वारा रचित है। इसमें श्री यमुना देवी की महिमा को समर्पित आठ छंद हैं।

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  1. श्री यमुनाष्टकं - श्री वल्लभाचार्य

    मैं श्री यमुना जी को प्रणाम करता हूँ जो समस्त सिद्धि को प्रदान करने वाली हैं । श्री यमुना जी के छोर की रज श्री कृष्ण के चरण कमल के समान चमक रही है । श्री यमुनाजी के तट पर स्थित कुंजों के फूलों की सुगंध से यमुना जी का पानी भी सुगंधित है। समस्त विनम्र एवं चतुर गोपियां यमुना जी की भक्ति करती हैं । श्री यमुना जी श्री कृष्ण की सुंदरता अपने में समेटे हुए है ।