श्री वृंदावन योगपीठ गोविंद निवासा - श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी, योग पीठ (54)
श्री वृंदावन धाम गोविंद से मिलन का उनका प्रकट निज निवास स्थल है, वहाँ श्री गदाधर भट्ट जी चरण-शरण में रहकर सेवा की आशा कर रहे हैं।
योग पीठ श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी ग्रंथ का प्रथम अध्याय है जिसमें श्री श्यामा श्याम और वृंदावन धाम से संबंधित विभिन्न लघु छंद हैं। लेखक: श्री गदाधर भट्ट
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श्री वृंदावन धाम गोविंद से मिलन का उनका प्रकट निज निवास स्थल है, वहाँ श्री गदाधर भट्ट जी चरण-शरण में रहकर सेवा की आशा कर रहे हैं।
श्री वृन्दावन की वह दिव्य शोभा, जहाँ कदम्ब के वृक्षों के नीचे श्री राधा-कृष्ण की नित्य आनंदमयी लीलाएँ (केलि) होती रहती हैं, अत्यंत अद्भुत है। उस अनुपम छवि को निहारने के लिए करोड़ों-करोड़ इंद्र (देवराज) भी स्वयं को दरिद्र (रंक) मानकर उस रस को पाने का लोभ करते हैं।