युगल केलि रस मंजरी [निकुंज केली माधुरी]

'युगल केलि रस मंजरी' निकुंज केली माधुरी का बारहवां अध्याय है, जिसकी रचना श्री अली माधुरी जी ने की है, जिसमें सखियों द्वारा श्री श्यामाश्याम की विभिन्न प्रकार की सेवाओं का वर्णन किया गया है।

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  1. नित्य विहारनि लाडली, नित्यविहारी लाल - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, युगल केलि रस मंजरी (1)

    श्री लाड़ली जी (राधा) नित्य विहार करने वाली हैं और श्री लाल जी (कृष्ण) भी नित्यविहारी हैं। इन दोनों युगल की केली-क्रीड़ा अत्यंत मधुर रस से भरी हुई है, जो साक्षात् आनंद का ही रसमय स्वरूप है।