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  1. नहिं चाहों बैकुंठ नहिं चहौं ब्रह्मानंद कौं - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (347)

    न तो मुझे वैकुण्ठ चाहिए, न ही ब्रह्मानंद चाहिए । न मुझे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम चाहिए, न ही नंदलाल श्री कृष्ण ।

  2. महारास देखवे पधारे शिव गोपिका ने - ब्रज के सेवैयाँ

    महारास के दर्शन करने के लिए भगवान शिव वृंदावन में पधारे, लेकिन द्वार पर खड़ी ललिता सखी ने शिवजी से कहा कि पहले दीक्षा लीजिए तब महारास में प्रवेश कीजिए।