4 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. दोउ चकोर, दोउ चंद्रमा, दोउ अलि, पंकज दोउ - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार, षोडश गीत (1)

    दोनों श्री राधा कृष्ण चकोर (वह पक्षी जो चन्द्रमा के प्रेम में विभोर रहता है) हैं, दोनों चन्द्रमा (चकोर का प्रेमास्पद) हैं, दोनों भ्रमर हैं और दोनों कमल पुष्प भी हैं । दोनों चातक हैं (वह पक्षी जो श्याम मेघ से प्रेम करता है) और दोनों मेघ हैं (चातक पक्षी का प्रेमास्पद), दोनों जल हैं एवं दोनों मछली भी हैं ।

  2. प्रेम सरोवर - बरसाना

    एक बार श्री कृष्ण और राधा रानी एक साथ बैठे हुए थे। एक मधुमक्खी राधा रानी के पास भिनभिना रही थी। कृष्ण ने मित्र को इसे दूर करने के लिए कहा। जब मित्र मधुमक्खी को दूर करके लौट आया, तो उसने कहा, "मधु चला गया है"। यहाँ मधु का मतलब मधुमक्खी है और मधु कृष्ण का नाम भी है।

  3. जय श्री वृषभानु दुलार की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (100)

    वृषभानु नंदिनी श्री राधा रानी की जय। अलबेली सरकार की जय। नंदकुमार श्री कृष्ण द्वारा सेवित स्वामिनी की जय। जिनकी दया का भण्डार कभी समाप्त नहीं होता उन दयामयी की जय हो।