5 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. श्री किशोरदास जी की जीवनी 

    मत्स्य देश ढुंढाहर में आमेर नगर में महान् विद्वान्, धर्मी, गुणों के धाम तथा परम भागवत घासीराम सारस्वत ब्राह्मण रहते थे। वे कथा कहने में बड़े प्रवीण थे। उनकी पत्नी खेमा लक्ष्मी जी के समान सुन्दर, उदार और हरिभक्ता थी। उसी की कोख से श्री किशोरदास जी ने जन्म लिया।

  2. रटो रे मन! छिन छिन श्यामा श्याम - प्रेम रस मदिरा, सिद्धांत माधुरी

    अरे मन! ‘श्यामा-श्याम’ इस युगल नाम को प्रत्येक क्षण रटता रह। यह श्यामा- श्याम सच्चिदानन्द ब्रह्म के ही दो अभिन्न स्वरूप हैं। अरे मन! इनके नाम को शिव, शुक, सनकादि परमहंस भी निरन्तर गाते रहते हैं।

  3. रटु निशिदिन राधे नाम रे - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, सिद्धान्त माधुरी (86)

    अरे मन ! तू निरन्तर राधे नाम की रटना कर ; जिसके नाम को पूर्णकाम श्यामसुन्दर भी रटते हैं, जिसकी अनुपम रूप माधुरी का श्यामसुन्दर निरन्तर ध्यान करते हैं, जिसके गुणों को प्रेम - विभोर होकर श्यामसुन्दर निरन्तर गाया करते हैं।

  4. हमारी राधे, रसिकनि - जीवन - मूरि - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदीरा, श्री राधा माधुरी (55)

    एक रसिक सखी कहती है कि हमारी स्वामिनी श्री वृषभानुनंदिनी रसिक जनों की जीवन – स्वरूपा हैं | जिनके चरणों की धूल को साक्षात् ब्रह्म श्रीकृष्ण भी चाहते हैं |

  5. अनूपम, जोरी श्यामा श्याम - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (01)

    श्यामा – श्याम की युगल जोड़ी सर्वथा अनुपमेय है | किशोरी जी ने अपना सोलह श्रृंगार कर रखा है एवं श्यामसुन्दर ने नटवर भेष बना रखा है | दोनों ही गलबाहीं दिये हुए वृन्दावन में निरन्तर विहार करते हैं |