रमणरेती, गोकुल-ब्रज की रेती में चलते भक्त। इधर राजा आसकरण जी को ऐसी होली लीला का दर्शन हुआ, जिसे देखकर वे तीन दिन तक वहीं उदासीन खड़े रहे।