राग दुर्गा

राग दुर्गा बिलावल थाट से सम्बंधित है। इस राग के गान से वातावरण में श्रृंगार रस उत्पन्न होता है। राग दुर्गा रात्रि के दूसरे प्रहर में गाया जाता है, रात्रि 9 बजे से 12 बजे के मध्य।

2 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. राधे आन पड़ो तेरे द्वार - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (33)

    हे राधे! मैं तुम्हारे द्वार पर आन पड़ी हूँ । हे वृषभानु नंदिनी! तुम्हें छोड़कर अब मैं किसे पुकारूँ? मैं संसार-सागर में डूब रही हूँ, कृपया अपनी कृपा की नाव से मुझे पार लगा दो।