राग मालव

राग मालव को भैरव राग भी कहते हैं, जिसका वर्णन संगीतदामोदर ग्रन्थ में किया गया है । इस राग को संध्या आरती एवं शयन के समय गाया जाता है।

2 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. तेरे नैंननि की बलि जाउँँ - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (76)

    हे श्री राधिका प्यारी! तुम्हारे नयनों पर बलिहारी जाता हूँ ! मोहन लाल श्री कृष्ण इन नैनों के रस से सदा भींजें रहते हैं एवं उनके ह्रदय को तुम्हारा नाम ही भाता है ।

  2. नाँचत मोहन संग राधिका - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (640)

    श्री राधिका सखी समूह को लिए मनमोहन श्री कृष्ण के संग नृत्य कर रही हैं । युगल जोरि श्री श्यामाश्याम प्रेम से भरकर एक-दूसरे को गलबाँही दिए हुए हैं ।