आनंदाष्टक [बयालीस लीला]

आनंदाष्टक श्री बयालीस लीला ग्रंथ का एक भाग है जिसमें आठ दोहों में श्री राधा कृष्ण आनंद एवं वृंदावन रस का वर्णन है । रचयिता: श्री हित ध्रुवदास

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. सखी सबै उडगन मनौं - श्रीध्रुवदास जी, बयालीस लीला, आनंदाष्टक लीला

    श्री वृंदावन नित्य विहार के नित्य नव निभृत निकुञ्ज विलासी चतुर्व्यूह परिकर का संक्षिप्त परिचयात्मक रूपक प्रस्तुत करते हुए श्रीहित ध्रुवदास जी कहते हैं कि आनंद धाम श्रीवृंदावन ही मानो एक निरभ्र, प्रेमाकाश है।

  2. वृंदावन रस अति सरस है कैसो करूँ बखान - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, आनंदाष्टक (8)

    हे जीवों! वृन्दावन-रस इतना आनंदित एवं सरस है कि कोई भी इसे बखान नहीं कर सकता। यहाँ तक कि भगवान विष्णु का "वैकुण्ठ धाम" भी इसकी तुलना में बेस्वाद है।