अनुराग लता [बयालीस लीला]

अनुराग लता 'बयालीस लीला' ग्रन्थ का अनुभाग है जिसे श्री हित ध्रुवदास द्वारा लिखा गया है जिसमें अनुराग रस की मधुरता का वर्णन किया गया है।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. तीन लोक कौ राज सुख - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, अनुराग लता (7)

    श्री वृंदावन की रज एवं प्रेम-रस के आगे तीनों लोक का राज-सुख, वैभव आदि कुछ भी नहीं है। यदि उसे तुला पर रखकर तोलें, तो उस वृंदावन प्रेमी के पल-भर का प्राप्त किया हुआ सुख त्रिलोक के राज-सुख को तुच्छ या हल्का कर दे।

  2. अनुरागे जिनके भजन - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, अनुराग लता (70)

    श्री ध्रुवदास जी कहते हैं कि जो रसिक जन युगल-किशोर के प्रेम रस-विहार के भजन-चिन्तन में अनुरक्त हैं, उन रसिकभक्तों की चरण-धूलि को प्राप्त करके पूर्ण श्रद्धा-भक्ति पूर्वक बारम्बार शिरोधार्य करना चाहिये।