तेरे चरनन में बलि जाऊँ - श्री भोली गोपी
हे मनमोहन बनवारी, मैं तेरे चरणों पर वारी-वारी जाऊँ ! तुम्हारे दर्शन से ही मुझे वास्तविक सुख मिलता है।
भोली गोपी, श्री वृंदावन के एक रसिक भक्त कवि
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हे मनमोहन बनवारी, मैं तेरे चरणों पर वारी-वारी जाऊँ ! तुम्हारे दर्शन से ही मुझे वास्तविक सुख मिलता है।
अब मैं वृंदावन में सदा वास करूँगी । संतों के संग बैठ बैठ कर अपने मन को श्री राधे जू के रंग में डूबा दूँगी । राधे नाम का रस पी पीकर लोक लाज का सर्वथा त्याग कर दूंगी ।
हे सखिरी, मेरे नंदलाल अत्यंत प्यारे हैं जिनके शीश पर मोर मुकुट है, वक्ष स्थल पर पीताम्बर है और जिनके घुंघराले बाल हैं । हाथों में कंगन हैं, होठों पर मुरली, और नैना चंचल एवं विशाल हैं ।