बिहार चंद्रिका

बिहार चंद्रिका, श्री नागरीदास जी की वाणी का एक भाग है, जिसमें उत्सव रस का बहुत सुन्दर प्राकट्य किया गया है। रचयिता: श्री नागरीदास

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. यमुना वृन्दाविपिन की, बरनी केलि अनूप - श्री नागरीदास जी की वाणी, बिहार चंद्रिका (85)

    श्री यमुना के तट पर स्थित श्री वृन्दावन की केलि अनूप और अवर्णनीय है। जो साधक निरंतर इस लीला की भावना करता है, वह अंततः उसी भावना में तन्मय होकर लीला-रस का साक्षात् अनुभव करने लगता है।

  2. दोऊ कोक कलानि में, पंडित परम प्रवीन - श्री नागरीदास जी की वाणी, बिहार चंद्रिका (55)

    दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण कोक कला में ऐसे पंडित परम प्रवीण हैं कि यह रसना से कहना असम्भव है क्यूँकि रसना नैंन रहित होती है ।