बृहद वामन पुराण की भाषा [बयालीस लीला]

'बृहद वामन पुराण की भाषा' श्री ध्रुवदास जी द्वारा रचित बयालीस लीला ग्रन्थ का सातवाँ अध्याय है, जिसमें बृहद वामन पुराण की कथाओं की ब्रज भाषा में व्याख्या की गयी है।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. सब तजि जुगल-किसोर भजि - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, बृहद वामन पुराण की भाषा (76)

    श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि यदि आप परम शांति की कामना रखते हैं, तो सभी सांसारिक आसक्तियों का त्याग करके श्री श्यामा-श्याम का भजन करें। मन-वचन से प्रेमपूर्वक युगल किशोर की सेवा में निरंतर लगे रहें।

  2. सर्वोपरी राधा कुंवरी प्रिय प्राणन के प्राण - श्री ध्रुवदास

    सर्वोपरि श्री राधा महारानी हैं, जो स्वयं श्रीकृष्ण के प्राणों की भी प्राण हैं। ललिता और अन्य सखियाँ उनकी ही सेवा में लीन रहती हैं, क्योंकि वे जानती हैं कि श्री राधा परम प्रवीण और सर्वोच्च रस की मूल स्रोत हैं।