आय सकत नहिं गिरा में संप्रदाय मम रीत - श्री चरण दास
मेरे संप्रदाय की रीति का पूर्ण वर्णन वाणी से कर पाना संभव नहीं। इसे प्रेम-सम्प्रदाय कहते हैं, इसकी कुछ अनुभूति और अभिव्यक्ति भी केवल प्रेम के माध्यम से ही संभव है।
श्री चरनदास जी की वाणी श्री चरनदास जी द्वारा लिखे गए विभिन्न भजनों और पदों का संग्रह है।
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मेरे संप्रदाय की रीति का पूर्ण वर्णन वाणी से कर पाना संभव नहीं। इसे प्रेम-सम्प्रदाय कहते हैं, इसकी कुछ अनुभूति और अभिव्यक्ति भी केवल प्रेम के माध्यम से ही संभव है।
दिव्य युगल श्री राधा-मोहन मेरे प्रिय इष्ट हैं, उनसे अधिक मधुर और प्रिय कोई नहीं। वे समस्त अवतारों के मूल अवतारी हैं, सबके सिरमौर हैं।
श्री वृंदावन धाम, श्री नंदग्राम गाँव, और बरसाना पुर वे स्थान हैं जहाँ जीवों की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
यदि हृदय ही चिंता की अग्नि में जल रहा हो, तो, हे चरणदास, मन कैसे श्री हरि के कमल चरणों में लगा हुआ रह सकता है?