कार्तिक स्नान [भारतेंदु ग्रंथावली]

कार्तिक स्नान श्री भारतेंदु हरिशचंद्र द्वारा रचित भारतेंदु ग्रंथावली का तीसरा अध्याय है जिसमें श्री राधा कृष्ण के विभिन्न लीला सम्बन्धी पद सहित दीप एवं दीपावली के 25 पद सम्मिलित हैं।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. मेरी गति होउ सोई महरानी - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (3)

    मेरी गति श्री राधिका महरानी हैं जिनकी भौंहौं की हिलनि को कृपा प्राप्त करने हेतु नित्य ही श्याम सुंदर भी निहारते रहते हैं।

  2. जय वृषभानु नन्दिनी राधा - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (1)

    श्री हरीचंद जी कहते हैं "जिनके चरण कमलों की वंदना भगवान शिव और ब्रह्मा करते हैं, वे श्री कृष्ण भी जिनकी आराधना करते हैं, उन वृषभानु नन्दिनी श्री राधा की जय हो।"