केलि माधुरी [श्री माधुरीदास]

केलि माधुरी, गौड़ीय संप्रदाय के श्री माधुरीदास द्वारा संकलित ग्रंथ है जिसमें केलि माधुरी का वर्णन किया गया है ।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. केलि माधुरी सिंधु के, कोऊ न पावत पार - श्री माधुरी दास, केलि माधुरी (125)

    वृन्दावन की इस अगाध केलि-माधुरी के सिंधु का कोई भी पार नहीं पा सकता, चाहे मन, वचन और कर्म से कोई निशि-दिन इसका निरंतर चिंतन करता रहे।

  2. वृंदावन की बात में जितै जितै मन जात - श्री माधुरी दास, केलि माधुरी (10)

    वृन्दावन की लीलाओं में मन जहाँ-जहाँ प्रविष्ट होता है, वहीं-वहीं वह और अधिक रस का अनुभव करता है। आश्चर्य यह है कि चित्त उस रस से कभी भी तृप्त नहीं होता, बल्कि निरंतर और अधिक चाहने लगता है।