जगत में जागै जाको भाग - श्री केलि सखि जी
संसार में जिसका भाग्योदय होता है, उसके ह्रदय में श्री वृन्दावन के दर्शन के लिए अनुराग होने लगता है ।
श्री केलि सखी, श्री वृंदावन धाम के एक रसिक संत
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संसार में जिसका भाग्योदय होता है, उसके ह्रदय में श्री वृन्दावन के दर्शन के लिए अनुराग होने लगता है ।
श्री कृष्ण की लीला जानने में शास्त्र और वेद भी असमर्थ हैं। पहले तो श्री कृष्ण कर्म बंधन के कारण देह प्रदान करते हैं और फिर मृत्यु का भी विधान कर देते हैं। फिर मनुष्य को काम, क्रोध, मद और लोभ का माया जाल दिखाते हैं।