मम देहस्थितैः सर्वैर्देवैर्ब्रह्मपुरोगमैः - कृष्णयामल तन्त्र (14.45)
श्री कृष्ण कहते हैं - हे राधे! मेरी देह में स्थित सर्व देव जैसे इंद्र, ब्रह्मादी ने आपकी आराधना की, इसीलिए आपको राधा कहा जाता है ।
कृष्णयामल तंत्र एक ग्रंथ है जो राधा कृष्ण और वृंदावन की महिमा का वर्णन करता है ।
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श्री कृष्ण कहते हैं - हे राधे! मेरी देह में स्थित सर्व देव जैसे इंद्र, ब्रह्मादी ने आपकी आराधना की, इसीलिए आपको राधा कहा जाता है ।
मोर के पंख में राधा के नेत्रों की छटा का दिग्दर्शन होता है, अत: मोरपंख को कृष्ण अपने मुकुट पर धारण करते हैं ।
नित्य विहार रस का सबसे आवश्यक अंग श्री वृन्दावन है, यहाँ की सघन कुंजों में ही राधा कृष्ण की नित्य विहार की लीलाएँ होती हैं ।