मान माधुरी [माधुरी दास]

मान माधुरी गौड़ीय संप्रदाय के श्री माधुरीदास द्वारा लिखित ग्रंथ है जिसमें श्री राधा का श्री कृष्ण से मान करना और श्री कृष्ण का उनके चरणों में गिरकर एवं सखियों की मदद से मनाने के सुंदर दोहे एवं पद लिखे हैं ।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. मृगनैनी आमोदनी महामोद की रास - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (40)

    हे मृग के समान चपल और सुंदर नेत्रों वाली, आनंद प्रदान करने वाली, साक्षात् महा-आनंद की पुंज, श्री राधा महारानी! हे गोवर्धन, वृंदावन के वनों और यमुना के तटों पर विलास (क्रीड़ा) करने वाली स्वामिनी! आप कृपा करके मेरे मन में सदैव निवास करें।

  2. नव रस सब नीरस लगे - श्री माधुरीदास, मान माधुरी (39)

    समस्त नवीन रस भी मान-माधुरी रूपी सर्वोपरि रस के बिना फीके प्रतीत होते हैं। एक बार इस परम माधुर्य-रस की प्राप्ति हो जाए, तो मन फिर किसी अन्य रस में नहीं रमता।