मृगनैनी आमोदनी महामोद की रास - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (40)
हे मृग के समान चपल और सुंदर नेत्रों वाली, आनंद प्रदान करने वाली, साक्षात् महा-आनंद की पुंज, श्री राधा महारानी! हे गोवर्धन, वृंदावन के वनों और यमुना के तटों पर विलास (क्रीड़ा) करने वाली स्वामिनी! आप कृपा करके मेरे मन में सदैव निवास करें।
