हमारे प्यारे श्यामाश्याम बिराजे - श्री नूपीबाई
रत्नजड़ित सिंहासन पर, समस्त सौंदर्य की निधि, हमारे प्यारे श्री श्यामा-श्याम आज सुशोभित हैं।
श्री नूपीबाई श्री शुक संप्रदाय से वृंदावन की एक रसिक भक्त थी ।
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रत्नजड़ित सिंहासन पर, समस्त सौंदर्य की निधि, हमारे प्यारे श्री श्यामा-श्याम आज सुशोभित हैं।
श्री हरि की कथा ही सच्चे सुख का भंडार है, जबकि संसार की चर्चाएँ केवल दुःख और संताप बढ़ाती हैं। श्री नूपीबाई जी कहती हैं कि हरि-नाम के बिना अन्य सांसारिक वचन प्रायः पापरूप ही होते हैं।