रास पंचाध्यायी [ब्रज विहार]

रास पंचाध्यायी ब्रज विहार का तैंतीसवां अध्याय है, जिसकी रचना श्री नारायण स्वामी जी ने की है। इसमें 24 छंद हैं, जिनमें दोहे और पद्य सम्मिलित हैं। यह श्रीमद्भागवत के प्रसिद्ध रास पंचाध्यायी पर आधारित है।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. प्राणनाथ या जगत में सो अभागिनी नार - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, रास पंचाध्यायी लीला (11)

    एक गोपी कहती है—हे प्राणनाथ (श्री कृष्ण)! इस संसार में वह स्त्री (अथवा जीव-रूपी नारी) अत्यंत अभागिनी है, जो आपको त्यागकर पुनः सांसारिक कुटुंब और परिवार के सुखों की चाहना करती है।

  2. प्रिय प्रीतम के गुण ललित, निगमागम को सार - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, रास पंचाध्यायी लीला (26)

    प्रिया प्रियतम (श्री राधा कृष्ण) के गुण मनोहर हैं जो वेदों एवं शास्त्रों का सार हैं । जो भी इनका गान एवं श्रवण करता है वह निश्चित ही भव से पार हो जाता है ।