रहस्य लता [बयालीस लीला]

रहस्य लता 'बयालीस लीला' ग्रन्थ का अनुभाग है जिसे श्री हित ध्रुवदास द्वारा लिखा गया है जिसमें रहस्य लीला की मधुरता का वर्णन किया गया है।

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. बार-बार तो बनत नहिं - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, रहस्य लता (60)

    मानव-तन की प्राप्ति, श्री वृन्दावन का निवास, रसिक भक्तो का संग अवं श्री श्यामा श्याम युगल रूप की इष्टता का यह अनुपम संयोग जीवन में अथवा अन्य जीवनो में बारम्बार सहज रूप से नहीं बनता ।

  2. बार बार तो बनत नहिं - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, रहस्य लता (60)

    मानव-तन की प्राप्ति, श्री वृन्दावन का निवास, रसिक भक्तों का संग तथा श्री श्यामा-श्याम युगल-रूप की इष्टता—यह अनुपम संयोग जीवन में अथवा अन्य योनियों में बार-बार सहज रूप से नहीं बनता।

  3. जो कह्यौ श्री हरिवंश रस बिरलौ समुझनहार - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, रहस्य लता (1)

    श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने जिस दिव्य वृन्दावन रस का वर्णन किया है, उसे समझने वाला कोई विरला (अत्यंत दुर्लभ) ही होता है। ऐसे रसिक जन पूरे संसार में खोजने पर भी मुश्किल से एक या दो ही मिलते हैं।