कुँवरि चाल सखि देखि कै - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, रंग हुलास (43)
श्री राधा की परम मनोहर चाल को देखकर श्रीकृष्ण अपनी ही गति-मति भूल गए। श्री राधा जू के विशाल नेत्रों की रसभरी चितवन को निहारकर वे चित्र के समान खड़े के खड़े रह गये।
रंग हुलास श्री ध्रुवदास जी द्वारा रचित बयालीस लीला ग्रन्थ का तीसवां अध्याय है जिसमें श्री राधा कृष्ण के प्रेम से सम्बंधित 52 दोहे हैं।
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श्री राधा की परम मनोहर चाल को देखकर श्रीकृष्ण अपनी ही गति-मति भूल गए। श्री राधा जू के विशाल नेत्रों की रसभरी चितवन को निहारकर वे चित्र के समान खड़े के खड़े रह गये।
नित्य-नवेली श्री राधा नख-शिख पर्यन्त परम सुहावनी एवं मनमोहनी हैं। उन पर कोटि-कोटि रति एवं साक्षात् महालक्ष्मी भी न्यौछावर हैं। यद्यपि प्रियतम श्याम-सुन्दर स्वयं मोहन हैं (मोहित करने वाले) हैं, तथापि श्री राधा के रूप-सौन्दर्य पर मुग्ध हुए उनके चरण-तल में विलुण्ठित होते रहते हैं।