रस के सेवैया [श्री बिहारिन देव जी की वाणी]

रस के सेवैया, ग्रंथ श्री बिहारिन देव जी की वाणी में श्री बिहारिन देव जू द्वारा लिखित रस के सेवैयाओं का संकलन है। रचैयता: श्री बिहारिन देव जू

4 लेख उपलब्ध हैं

  1. सब ठाकुर को ठाकुर हरि - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, रस के सवैया (01)

    यह बार सर्वस्व विदित है कि श्रीहरि समस्त ठाकुरों के भी ठाकुर हैं, किन्तु उन सर्वेश्वर श्रीहरि की भी स्वामिनी श्रीराधा हैं। प्राणप्रिय श्रीकृष्ण अपना सारा मान-अभिमान त्यागकर अपनी स्वामिनी श्री राधा से प्रेम की याचना करते रहते हैं और अपना समस्त प्रभुत्व छिपाकर उनके प्रेम के अधीन होकर ही रहते हैं।

  2. रहैं अंग संग अनंग हरैं मनु - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, रस के सेवैया (30)

    वे दोनों सदा एक साथ रहते हैं, जिनका सौंदर्य स्वयं कामदेव (अनंग) का मन भी मोह लेता है। श्रीकृष्ण का रूप नव-वर्षा के मेघ के समान है, और श्रीराधा बिजली की चमक जैसी दैदीप्यमान।