रस की साखी [श्री ललित किशोरी देव]

रस की साखी, ग्रंथ श्री ललित किशोरी देव जी की वाणी में श्री श्री ललित किशोरी देव द्वारा लिखित रस के दोहों का संकलन है। रचैयता: श्री ललित किशोरी देव

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. प्रिया आसिक मासूक हम - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (106)

    श्री ललित किशोरी जी कहती हैं कि श्री प्रियाजी से हमारा ऐसा घनिष्ठ संबंध है कि वे हमारी आशिक (प्रेमी) हैं और हम उनके माशूक (प्रेम-पात्र) हैं। वे हमें प्रत्येक क्षण आनंद देती हैं। श्री कुंजबिहारिनी लाड़िली जू हमें अपने अंक में भर-भर कर रखती हैं।

  2. हमरे सुख कौ वपु बन्यौ - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (105)

    नित्य निभृत निकुंज में अपने प्राणप्रियतम श्री कुंजविहारी के संग नित्य केलि-विहार करने वाली रसस्वरूपा कुंजविहारिणी लाड़िली हमारे सुख का ही स्वरूप बनी हुई हैं। उनका वपु-देह हमारे सुख के लिए ही सुखस्वरूप प्रकट हुआ है। ऐसे रस से परिपूर्ण अद्भुत रसाल रूप वाली ललित किशोरी लाड़िली हमें नित्य ही अद्भुत सुख प्रदान करती हैं।

  3. श्री कुंजबिहारिणी लाड़ली - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस की साखी (185)

    वृन्दावन की कुंजों में विहार करने वाली हे श्री प्यारी जू! आप अत्यंत उदार और दयालु हैं। आप श्रीकृष्ण को भी संतुष्ट एवं पोषित करती हैं, क्योंकि उस दिव्य प्रेम-राज्य की आप शिरोमणि हैं।