रस मंजरी

रस मंजरी 8 श्लोकों की संक्षिप्त रचना है जिसकी रचना श्री हरिव्यास देवाचार्य के शिष्य श्री रूप रसिक देवाचार्य ने की है ।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. रस मैं मगन बिहारिनी दिय - श्री रूपरसिक देवाचार्य, रस मंजरी (2)

    परम रस में निमग्न श्री विहारिणीजी (श्री राधा) ने अपने प्रियतम श्री कृष्ण के गले में अपनी भुजा डाली हुई है। इस अत्यंत सुंदर और सलोनी शय्या पर विराजमान यह युगल समस्त सौंदर्य की चरम सीमा प्रतीत हो रहा है।

  2. इनको सहज सुहाग सुख, वर्णनत बनत न बैंन - श्री रूपरसिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (7)

    श्री प्रिया-प्रियतम का सहज दाम्पत्य-रस वाणी से वर्णित नहीं किया जा सकता। यदि इसका परिचय प्राप्त करना है, तो निष्काम रसमय भजन के नेत्रों से इसे निहारना होगा।