इनको सहज सुहाग सुख, वर्णनत बनत न बैंन - श्री रूपरसिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (7)
श्री प्रिया-प्रियतम का सहज दाम्पत्य-रस वाणी से वर्णित नहीं किया जा सकता। यदि इसका परिचय प्राप्त करना है, तो निष्काम रसमय भजन के नेत्रों से इसे निहारना होगा।
रस मंजरी 8 श्लोकों की संक्षिप्त रचना है जिसकी रचना श्री हरिव्यास देवाचार्य के शिष्य श्री रूप रसिक देवाचार्य ने की है ।
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श्री प्रिया-प्रियतम का सहज दाम्पत्य-रस वाणी से वर्णित नहीं किया जा सकता। यदि इसका परिचय प्राप्त करना है, तो निष्काम रसमय भजन के नेत्रों से इसे निहारना होगा।