रसिक मंजरी

रसिक मंजरी 12 श्लोकों की संक्षिप्त रचना है जिसकी रचना श्री हरिव्यास देवाचार्य के शिष्य श्री रूप रसिक देवाचार्य ने की है ।

4 लेख उपलब्ध हैं

  1. रसिक शिरोमनि सांवरो गौरी अद्भुत रूप - श्री रूपरसिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (2)

    रसिक-शिरोमणि श्यामसुन्दर और अद्भुत रूप-लावण्य से युक्त गौरवर्णा श्री राधा, श्रीधाम वृन्दावन के गहन कुंजों में युगल रूप से विविध रसपूर्ण लीलाओं में नित्य विहार करते हैं।

  2. नित नव दूलह-दुलहिनी, सुंदर सहज सुदेश - श्री रूपरसिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (3)

    मनोहर देश श्री वृंदावन धाम में नित्य नवीन दूल्हा दुल्हन विराजमान हैं जिनकी बदन ज्योति पर कोटि कोटि चंद्रमाओं को न्यौछावर कर देना चाहिए ।

  3. प्रीतम कै धन प्यारी ए, प्यारी कै धन पीय - श्री रूपरसिक देवाचार्य, रसिक मंजरी (11)

    निकुंजेश्वर श्रीकृष्ण का सर्वस्व श्री राधा हैं और निकुंजेश्वरी श्री राधा का सर्वस्व श्रीकृष्ण। एक-दूसरे के अतिरिक्त उन्हें कुछ भी प्रिय नहीं लगता; एक-दूसरे के संग में ही उनका प्राण और जीवन निहित है।