हर दम याद किया कर हरि की - श्री सहचरीशरण देव, सरसमंजावली (8)
हे मन, प्रत्येक क्षण तू श्री हरि का स्मरण किया कर, तेरे दुःख को वे हर लेंगे । मेरा कहा असत्य नहीं होगा, आनँदकंद श्री कृष्ण अवश्य तुझपर कृपा करेंगे ।
सरसमंजावली के रचयता हरिदासी परंपरा के आचार्य श्री सहचरिशरण जी हैं । इस ग्रन्थ में 148 माँझ हैं, जिसमें सिद्धांत, ज्ञान, भक्ति, श्रृंगार रस का समावेश है ।
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हे मन, प्रत्येक क्षण तू श्री हरि का स्मरण किया कर, तेरे दुःख को वे हर लेंगे । मेरा कहा असत्य नहीं होगा, आनँदकंद श्री कृष्ण अवश्य तुझपर कृपा करेंगे ।
अनंत-अनंत सौंदर्य-माधुर्य-निधि ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज के सिर पर बंधी टेडी पाग सुशोभित हो रही है। पाग पर चन्द्रिका और तिरछे लगे तुर्रे की शोभा बड़ी ही निराली है।