मना ! वृषभानुनन्दिनी जाँचि - श्री हित विट्ठल जू
हे मन, तू वृषभानु नन्दिनी श्री राधा से याचना कर । जिन श्री राधा की आराधना मुरलीधर श्री कृष्ण करते हैं, उनके नाम का नित्य गान करते हुए नृत्य कर ।
श्री हित विठ्ठल जू की वाणी, वृंदावन के रसिक संत श्री हित विट्ठल जू द्वारा रचित है जो गोस्वामी श्री वनचंद्र जी के पुत्र श्री नागरवर के शिष्य थे ।
2 लेख उपलब्ध हैं
हे मन, तू वृषभानु नन्दिनी श्री राधा से याचना कर । जिन श्री राधा की आराधना मुरलीधर श्री कृष्ण करते हैं, उनके नाम का नित्य गान करते हुए नृत्य कर ।
श्री कृष्ण सखी से कहते हैं कि समस्त विश्व के विस्तार का जीवन ब्रज भूमि है, और ब्रज भूमि का जीवन वृंदावन है और वृंदावन का जीवन आधार नवनागरी श्री राधा हैं ।