श्री कृष्ण सिद्धांत पंचाध्यायी [श्री नंददास जी]

श्री कृष्ण सिद्धांत पंचाध्यायी श्री नंददास जी द्वारा रचित नंददास ग्रंथावली का दूसरा अध्याय है, जिसमें कुल 138 रोला छंद हैं, एवं इसमें श्री कृष्णभक्ति के सिद्धांत, स्वरुप एवं गोपी प्रेम को प्रकट किया गया है।

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. नंददास सौं नंदसुवन, जौ करुना कीजै - श्री नंददास ग्रंथावली, श्री कृष्ण सिद्धान्त पंचाध्यायी (138)

    हे नंदनंदन,श्री कृष्ण! यदि आप मुझपर करुणा करना चाहते हैं तो मुझे अपने निज भक्तों के चरणों का रस अनुराग प्रदान कीजिए ।

  2. पुनि तिनकी पद-पंकज-रज - श्री नंददास ग्रंथावली, श्री कृष्ण सिद्धान्त पंचाध्यायी (42)

    ब्रजांगनाओं के चरण-कमलों की रज की अभिलाषा स्वयं ब्रह्मा जी भी करते हैं, और उद्धव भी अपनी विशुद्ध बुद्धि से बार-बार उसी दिव्य रज की कामना करते हैं।

  3. श्री वृंदावन चिद्घन घन - श्री नंददास, नंद दास ग्रंथावली, श्री कृष्ण सिद्धांत पंचाध्यायी (20)

    श्री वृंदावन धाम चिद्घन है, जिसकी छवि अत्यंत मनमोहक है, जहाँ नंदनंदन श्री कृष्ण का नित्य निवास है, जिसकी महिमा शास्त्रों द्वारा गाई गई है।