श्री नवल देव जी की वाणी

श्री नवल देव जी की वाणी श्री हरिदासी संप्रदाय के रसिक संत श्री नवल देव जी द्वारा लिखी गई है। इस ग्रंथ में कुल 8 पद हैं ।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. रंग भरयौ लालन रंगीली प्यारी राधा - श्री नवलदेव जी की वाणी (7)

    रंगीली श्री राधा श्री लाल जी के ह्रदय में प्रेम के रंग भरती हैं । श्री प्रिया लाल का एक ही तन और मन है एवं दोनों एक समान ही हैं । वे दोनों एक क्षण के लिए भी दूसरे से विलग नहीं होते ।