तालन पै ताल पै तमालन - श्री पद्माकर
शरद ऋतु की उज्ज्वल चाँदनी सरोवरों पर, ताल एवं तमाल के वृक्षों पर, गले की मालाओं पर, वृंदावन की गलियों में तथा विहार-स्थल बंशीवट पर सर्वत्र फैल गई है।
पद्माकर (1753 - 1833) रितिकाव्य के प्रसिद्ध कवि और सुप्रसिद्ध लेखक हैं। उन्होंने अधिकतर कृष्ण की लीलाओं, श्रृंगार रस, श्री राधा के सौंदर्य आदि के पद लिखे हैं ।
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शरद ऋतु की उज्ज्वल चाँदनी सरोवरों पर, ताल एवं तमाल के वृक्षों पर, गले की मालाओं पर, वृंदावन की गलियों में तथा विहार-स्थल बंशीवट पर सर्वत्र फैल गई है।
फाग की भीड़-भाड़ में जब अवसर मिला, तो श्री राधा गोरी ने श्रीकृष्ण को पकड़कर भीतर खींच लिया।
किसी स्त्री के वियोग में इस प्रकार की निरंतर बढ़ती हुई अशांति मैंने पहले कभी न तो देखी ही है और न कभी सुनी ही है ।