श्री प्रह्लाद जी

श्री प्रह्लाद जी वृंदावन धाम के हरिदासी संप्रदाय के रसिक कवि हैं ।

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. रसशेखर रसराजवर रस अनन्य हरिदास - श्री प्रह्लाद जी

    जो रस के शिरोमणि, रसराजवर (रस के परम सम्राट) एवं प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार-रस के अनन्य रसिक हैं — वे हैं श्रीस्वामी हरिदास जी। उनके स्मरण एवं दर्शन मात्र से मन प्रिया-प्रियतम के रस में मोहित हो उठता है। वे निधिवन के परम गोपनीय रंगमहल में नित्य निवास करते हैं।

  2. नाय जानत प्रभु प्रार्थना - श्री प्रह्लाद जी

    हे प्रभु, न तो मैं प्रार्थना करना जानता हूँ, न पूजन, न नियम का पालन करना और न ही प्रसाद की महिमा का ज्ञान है । मेरी बस एक ही चाह है कि आपके अद्भुत रूप के रस का सदा छक कर पान करता रहूँ ।