श्री प्रह्लाद जी
श्री प्रह्लाद जी वृंदावन धाम के हरिदासी संप्रदाय के रसिक कवि हैं ।
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रसशेखर रसराजवर रस अनन्य हरिदास - श्री प्रह्लाद जी
जो रस के शिरोमणि, रसराजवर (रस के परम सम्राट) एवं प्रिया-प्रियतम के नित्य-विहार-रस के अनन्य रसिक हैं — वे हैं श्रीस्वामी हरिदास जी। उनके स्मरण एवं दर्शन मात्र से मन प्रिया-प्रियतम के रस में मोहित हो उठता है। वे निधिवन के परम गोपनीय रंगमहल में नित्य निवास करते हैं।
करहिं कृपा प्रह्लाद प्रिय- श्री प्रह्लाद जी
हे प्रह्लाद के प्यारे, भक्तों के प्रतिपाल, स्वामी श्री हरिदास के लाड़ले ठाकुर श्री बाँके बिहारी लाल, मुझ पर कृपा कीजिए ।
नाय जानत प्रभु प्रार्थना - श्री प्रह्लाद जी
हे प्रभु, न तो मैं प्रार्थना करना जानता हूँ, न पूजन, न नियम का पालन करना और न ही प्रसाद की महिमा का ज्ञान है । मेरी बस एक ही चाह है कि आपके अद्भुत रूप के रस का सदा छक कर पान करता रहूँ ।